परिषदीय विद्यालयों में बच्चों को बेहतर सुविधाएं देने के लिए ऑपरेशन कायाकल्प पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए, लेकिन जमीनी हकीकत सरकारी दावों से अलग नजर आ रही है। जिले के 2,266 परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले करीब 2.10 लाख छात्र-छात्राओं को आज भी शौचालय जैसी बुनियादी सुविधा के लिए जूझना पड़ रहा है। शनिवार को पड़ताल में कई स्कूलों में शौचालयों पर ताले लटके मिले, कई जगह गंदगी के कारण उनका इस्तेमाल नहीं हो रहा, जबकि कुछ विद्यालयों में दिव्यांग शौचालय महीनों से बंद या अधूरे पड़े हैं। सबसे ज्यादा परेशानी छात्राओं और दिव्यांग बच्चों को उठानी पड़ रही है।