बिजली निगम का दावा है कि गांवों में ट्रांसफॉर्मर फुंकने के 48 घंटे के भीतर नया ट्रांसफॉर्मर लगाकर आपूर्ति बहाल कर दी जाती है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है। जिले के कई गांवों में ट्रांसफॉर्मर फुंकने के 10 से 15 दिन बाद भी बिजली नहीं लौटी है। उमस भरी गर्मी और ओवरलोडिंग के कारण जुलाई में रोजाना औसतन 40 ट्रांसफॉर्मर जल रहे हैं। सीमित स्टॉक और मरम्मत सामग्री की कमी के चलते विभाग मांग के मुकाबले पीछे छूट गया है। इसका खामियाजा 50 हजार से अधिक ग्रामीण भुगत रहे हैं। कहीं दलित बस्ती अंधेरे में डूबी है तो कहीं धान की रोपाई रुक गई है। पेयजल संकट और बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है।