मंदी की मार से हताश खिमसेपुर के मोहल्ला नंदसा निवासी किसान अमरजीत ने सोमवार दोपहर दो बीघा आलू की फसल ट्रैक्टर से जुतवा दी। किसान ने यह फैसला लागत के बाद खोदाई की मजदूरी व भाड़े का खर्च भी न निकलने पर लिया। वह अब इस खेत में गेहूं की बोआई करेंगे। कहा, अगर भाव नहीं बढ़े तो शेष 10 बीघा आलू बची फसल भी जुतवा देंगे। नगर पंचायत खिमसेपुर के वार्ड नं 5 उदित नारायण नगर (नंदसा) निवासी अमर जीत सिंह के पास 15 बीघा खेती है। उन्होंने इस बार 12 खेत में आलू की फसल बोई है। इसमें दो बीघा खेत की फसल दो माह से अधिक समय से तौयार हो गई थी पर भाव ठीक न मिलने से वह खोदाई नहीं करा रहे थे। पिछले दो दिन से मंडी में भाव गिरने से वह और चिंतित हो गए। इसके साथ ही गेहूं की बुआई भी लेट हो रही थी। इसके चलते सोमवार दोपहर उन्होंने अपनी दो बीघा आलू की फसल को ट्रैक्टर से जुतवा दिया। उनका कहना है कि मंडी में आलू के पैकेट (50 किलो) का मूल्य मात्र 100 रुपये से लेकर 125 रुपये तक है, जबकि आलू की बुआई में लागत बहुत अधिक लगी है। उन्होंने लवकार आलू बोया था। डीएपी व यूरिया खाद भी सही मात्रा में डाली। दो बीघा खेत में 60 हजार रुपये का आलू निकलने की उम्मीद थी। अब स्थिति यह है भाव गिरने से आलू की खोदाई में मजदूरी का खर्च और फिर मंडी तक आलू ले जाने का भाड़ा निकलना भी मुश्किल है। इसी वजह से उन्होंने फसल जुतवाना ही मुनासिब समझा। उधर, नंदा के किसान मुकेश कश्यप, महावीर का कहना है यदि आलू के भाव में इजाफा न हुआ तो वह भी अपनी आलू की फसल जोत देंगे। किसानों ने आलू का निर्यात बढ़ाने और न्यूनतम समर्थन मूल्य लागू करने की मांग की। अमरजीत ने कहा कि भाव न बढ़ा तो 10 बीघा आलू की जो फसल बची है, वह भी जुतवा देंगे।