चंदौली के बरहनी विकास खंड के रेवसा ग्राम सभा में बंदरों का आतंक ग्रामीणों के लिए गंभीर समस्या बन गया है। पिछले लगभग एक वर्ष से गांव के लोग भय के माहौल में जीवन यापन कर रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार बंदरों ने अब तक 40 से अधिक लोगों को काटकर घायल कर दिया है, जिससे पूरे गांव में दहशत का वातावरण है। ग्रामीणों ने बताया कि शुरुआत में गांव में केवल एक बंदर दिखाई दिया था। इसे सामान्य घटना समझकर नजरअंदाज कर दिया गया, लेकिन कुछ ही दिनों में दो अन्य बंदर भी गांव में आ गए। इसके बाद तीनों बंदरों ने पूरे गांव में उत्पात मचाना शुरू कर दिया। ग्रामीणों के अनुसार बंदर विशेष रूप से छोटे बच्चों और बुजुर्गों को निशाना बना रहे हैं। बंदरों के भय से बच्चे घरों के बाहर खेलने से बच रहे हैं, जबकि बुजुर्ग आवश्यक कार्यों के लिए भी बाहर निकलने में हिचकिचा रहे हैं। कई ग्रामीण बंदरों के हमले में घायल हो चुके हैं और उन्हें उपचार कराना पड़ा है। लोगों का कहना है कि जिले के कई ग्रामीण क्षेत्रों में बंदरों की समस्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन प्रशासन और वन विभाग की ओर से अब तक कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया है। रेवसा निवासी संजय सिंह ने बताया कि उनकी वृद्ध माता को भी बंदरों ने काट लिया था। उन्होंने जिला प्रशासन और वन विभाग से मांग की कि बंदरों को पकड़कर सुरक्षित स्थान पर भेजा जाए, ताकि ग्रामीणों को राहत मिल सके। ग्रामीणों ने बंदरों के आतंक से निजात दिलाने के लिए विशेष अभियान चलाने और गांव में सुरक्षा के ठोस इंतजाम करने की मांग की है। इस दौरान गुप्तेश्वर सिंह, नीरज सिंह, भगेलु सिंह, गुड्डू सिंह, विजय बहादुर तिवारी, कैलाश पति सिंह, राजन सिंह और रामअवध सिंह सहित अनेक ग्रामीण उपस्थित रहे।