देशभर में प्रस्तावित आम हड़ताल के समर्थन में बुधवार को चकिया में वामपंथी संगठनों ने जोरदार प्रदर्शन किया। मां काली जी के पोखरा और डूहीं-सूहीं डॉ. अंबेडकर पार्क से सैकड़ों किसान, मजदूर, महिलाएं और नौजवान लाल झंडा लहराते हुए जुलूस के रूप में निकलकर गांधी पार्क परिसर पहुंचे, जहां एक जनसभा का आयोजन किया गया। सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने केंद्र और राज्य सरकार की जनविरोधी नीतियों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी और योगी सरकार ने पहले जो अधिकार मजदूरों, किसानों और महिलाओं को दिए थे, उन्हें अब छीनने का प्रयास किया जा रहा है। वक्ताओं ने कहा कि केंद्र सरकार पूंजीपतियों के दबाव में चार श्रम कानून लागू करने की तैयारी में है, जिससे देश के लाखों मजदूरों को शोषण का शिकार होना पड़ेगा। वक्ताओं ने आगे कहा कि सरकारी स्कूल, अस्पताल, और सार्वजनिक उद्योग जो जनता के पैसे से खड़े किए गए हैं, उन्हें अब निजी हाथों में बेचा जा रहा है। शिक्षा, स्वास्थ्य और खेती जैसी बुनियादी आवश्यकताएं आम गरीब और किसानों की पहुंच से बाहर होती जा रही हैं। सरकार ‘दो भारत’ का निर्माण कर रही है - एक, जहां चंद पूंजीपतियों के पास अपार संपत्ति है और दूसरा, जहां बहुसंख्यक आबादी की आमदनी लगातार घट रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा और आरएसएस धार्मिक मुद्दों को हवा देकर जनता का ध्यान मूल सवालों से भटका रही है। सभा को आईपीएफ के दिनकर कपूर, भाकपा माले के अनिल पासवान, विजई राम, किसान सभा के शंभूनाथ यादव, लालचंद सिंह एडवोकेट, राजेंद्र यादव, महिला समिति की लालमनी विश्वकर्मा, सीटू के महानंद और खेत मजदूर यूनियन से शिवमूरत सहित अन्य नेताओं ने संबोधित किया।सभा की अध्यक्षता पांच सदस्यीय अध्यक्ष मंडल ने की, जिसमें परमानंद, शिवमूरत, अखिलेश दूबे, रमायण राम और जयप्रकाश शामिल रहे। सभा का संचालन शंभूनाथ यादव ने किया। सभा के अंत में उपस्थित लोगों ने 12 सूत्रीय मांगपत्र तैयार कर नायब तहसीलदार को सौंपा, जिसमें मजदूरों और किसानों के हक से जुड़े बुनियादी सवाल शामिल थे।