गंगा नदी पर स्थित 20 क्यूसेक क्षमता वाले कुंडा पम्प कैनाल में 11 वर्ष बाद पम्प सेट और मोटरों को बदलने का कार्य युद्ध स्तर पर किया जा रहा है। करीब 19 लाख रुपये की लागत से चल रहे इस कार्य में नौ मजदूर लगाए गए हैं। मरम्मत और नए उपकरणों की स्थापना पूरी होने के बाद क्षेत्र के किसानों को सिंचाई की समस्या से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। 2015-16 के वित्तीय वर्ष में कुंडा पंप कैनाल का मरम्मत कार्य कराया गया था । कुंडा पम्प कैनाल से लगभग 363 हेक्टेयर कृषि भूमि की सिंचाई होती है तथा एक दर्जन से अधिक गांवों के किसान इस परियोजना पर निर्भर हैं। वर्षों पुरानी और जर्जर हो चुकी मोटरों तथा पम्पों के कारण क्षमता के अनुरूप पानी की आपूर्ति नहीं हो पा रही थी, जिससे किसानों को खेती के दौरान परेशानी का सामना करना पड़ता था। लघु डाल नहर खंड की परियोजना के तहत करीब 15 दिन पूर्व तीन मोटर और तीन पम्प बदलने का कार्य शुरू किया गया। अब तक दो नई मोटरें और दो पम्प स्थापित किए जा चुके हैं। शेष कार्य भी तेजी से कराया जा रहा है।अधिकारियों का कहना है कि धान की नर्सरी के मौसम को देखते हुए जल्द से जल्द पम्प कैनाल को पूरी क्षमता के साथ चालू करने का लक्ष्य रखा गया है। कुंडा पम्प कैनाल के जेई विनय पाण्डेय ने बताया कि 5 जून से पहले सभी मोटरों और पम्पों को चालू कर दिया जाएगा। इसके बाद किसानों को धान की नर्सरी लगाने और सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि नई मोटरों और पम्पों के लगने से कैनाल की जलापूर्ति क्षमता में सुधार होगा तथा क्षेत्र के किसानों को समय पर सिंचाई का लाभ मिल सकेगा।