धानापुर क्षेत्र के नरौली गांव में बीते चार अक्टूबर की रात हुई भारी बारिश में बबलू निषाद का कच्चा घर पूरी तरह ढह गया था। इसके तीन माह बीत जाने के बाद भी पीड़ित परिवार प्रशासनिक सहायता से वंचित है। दुखद स्थिति यह है कि खराब मौसम, ठंड और मच्छरों के बीच परिवार आज भी खुले आसमान के नीचे रहने को विवश है। मकान ढहने के बाद परिवार गांव के काली माता मंदिर के पास अस्थायी रूप से गुजर-बसर कर रहा है। छोटे बच्चों और महिलाओं के साथ खुले में जीवन व्यतीत करना पीड़ितों के लिए बेहद कठिन हो गया है। गिरे घर का मलबा, बिखरा सामान और टूटा हुआ आशियाना प्रशासनिक लापरवाही की कहानी बयां कर रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि घर गिरने की सूचना उसी दिन राजस्व विभाग और तहसील प्रशासन को दे दी गई थी लेकिन तीन महीनों में कोई भी टीम मौके पर नहीं पहुंची है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन की उदासीनता पर नाराजगी जताते हुए कहा कि पीड़ित परिवार को तत्काल राहत राशि और मदद मिलनी चाहिए। इस संबंध में उपजिलाधिकारी कुंदन राज कपूर ने बताया कि उन्हें मामले की जानकारी नहीं थी। उन्होंने मामले की जांच करवाने और पीड़ित परिवार को शासन की ओर से मदद उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है।