मई और जून के महीनों में पड़ रही रिकॉर्ड तोड़ भीषण गर्मी से जहां आम जनजीवन अस्त-व्यस्त है, वहीं बेजुबान पशु-पक्षी भी इस तपिश में बूंद-बूंद पानी और दाने-दाने के लिए व्याकुल हैं। इंसानों के पास तो धूप से बचने के साधन हैं, लेकिन खुले आसमान के नीचे रहने वाले वन्यजीव और छुट्टा जानवर इस वक्त दोहरी मार झेल रहे हैं। क्षेत्र के आसमान से बरसती आग और चिलचिलाती धूप के बीच सबसे बदतर स्थिति नीलगायों (घणरोज) की है। इस समय पूरे क्षेत्र के सिवान (खेत) पूरी तरह से सूखे पड़े हैं। जलाशयों और पोखरों का पानी सूख चुका है, जिसके कारण इन बेजुवानों को सुबह होते ही पानी और चारे की तलाश में मीलों भटकना पड़ता है। तपती दुपहरी में नीलगायों का झुंड का झुंड पानी की तलाश में व्याकुल होकर इधर-उधर दौड़ता नजर आता है।