नौगढ़ के सावन माह के पहले सोमवार को नौगढ़ क्षेत्र के घने केसार जंगल में स्थित प्राचीन दीवानी चुआर शिव मंदिर में शिवभक्ति की अनुपम छटा देखने को मिली। मंदिर परिसर और आस-पास का इलाका 'हर-हर महादेव' और 'बम-बम भोले' के जयकारों से गूंजता रहा। श्रद्धालुओं की विशाल भीड़ ने इस स्थल को भक्ति, अध्यात्म और संस्कृति के केंद्र में बदल दिया। सुबह से ही श्रद्धालु जन समूहों में मंदिर पहुंचने लगे। भक्तों ने भगवान भोलेनाथ के शिवलिंग पर गंगाजल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और पुष्प अर्पित कर पूजा-अर्चना की। मंदिर परिसर में घंटियों की ध्वनि और वैदिक मंत्रोच्चारण ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। इस अवसर पर चंदौली जनपद के साथ-साथ सोनभद्र से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। महिलाएं पूजा की टोकरी और जल कलश लेकर समूहों में मंदिर पहुंचीं और भोलेनाथ का दर्शन कर अपनी मनोकामनाएं अर्पित कीं।मंदिर के महंत बाबा बीर गिरी और किशन गिरी ने बताया कि सावन माह में यहां भक्तों की संख्या लगातार बढ़ती जाती है। "यह शिवधाम चमत्कारी और जागृत है। जो भी श्रद्धालु सच्चे मन से बाबा का ध्यान करता है, उसकी हर मुराद बाबा पूरी करते हैं।"महंतों ने बताया कि इस मंदिर का इतिहास अत्यंत प्राचीन है और इसके चमत्कारी जल स्रोत, जिसे 'दीवानी चुआर जलधारा' कहा जाता है, से जल लेकर अभिषेक करने की परंपरा आज भी जीवित है। यह जल स्रोत जंगल के बीचों-बीच स्थित होने के कारण श्रद्धालुओं को प्रकृति और अध्यात्म का एक साथ अनुभव कराता है। जंगल के मध्य स्थित यह मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केन्द्र है, बल्कि यहां आने पर शांति, सादगी और प्रकृति की पवित्रता का अनुभव होता है। भक्तों का कहना है कि इस स्थान की ऊर्जा निराली है- यहां आने मात्र से मन को सुकून और स्थिरता का अनुभव होता है।