कड़ाके की ठंड और भीषण गलन के बाद मंगलवार को सूर्य देव ने हल्की किरणें धरती पर बिखेरीं, जिससे वातावरण में कुछ गर्माहट महसूस हुई। गलन के कारण घरों में दुबके रहने वाले ग्रामीण इस अवसर का लाभ उठाने के लिए बाहर निकले। महिलाओं और बुजुर्गों ने घर के आंगन और छतों पर बैठकर धूप सेंकी। सबसे अधिक उत्साह बच्चों में देखने को मिला जिन्होंने समूह बनाकर गंगा किनारे की रेतीली जमीन पर पतंगबाजी का जमकर लुत्फ़ उठाया। लोगों का कहना था कि धूप ने उन्हें ठंड से बड़ी राहत दी है। वहीं, मौसम में आए इस बदलाव से किसानों को भी थोड़ी राहत मिली है। लगातार जारी शीतलहर और पाले जैसी स्थिति के कारण रबी की फसलों विशेषकर आलू, मटर और सरसों के विकास पर ब्रेक लग गया था। धूप निकलने से उम्मीद है कि फसलों का रुका हुआ विकास अब तेजी से हो सकेगा। किसानों ने बताया कि दिन में धूप का खिलना फसलों को पाले के संभावित नुकसान से बचाता है और नमी को नियंत्रित करता है। हालांकि, यह राहत क्षणिक साबित हुई। सूरज ढलते ही क्षेत्र में कड़ाके की ठंड और गलन लौट आई जिससे जनजीवन एक बार फिर प्रभावित हुआ।