अपनी दस सूत्रीय मांगों को लेकर आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने काले आम चौराहे पर जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने अपनी मांगों से संबंधित एक ज्ञापन भी सौंपा। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं दशकों से महिला एवं बाल विकास विभाग की रीढ़ के रूप में कार्य कर रही हैं, लेकिन उन्हें अभी तक पूर्णकालिक सरकारी कर्मचारी का दर्जा, कानूनी सामाजिक सुरक्षा या सम्मानजनक सुविधाएं प्राप्त नहीं हुई हैं। प्रदर्शन का नेतृत्व कर रही जिला अध्यक्ष सावित्री चौधरी ने बताया कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा गया है, जिसमें वेतन वृद्धि सहित दस सूत्रीय मांगें शामिल हैं। उन्होंने सरकार को चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो वे एक बड़े आंदोलन का सहारा लेंगी। प्रशासन को 9 जनवरी और 18 जनवरी, 2026 को होने वाले आगामी आंदोलनों की पूर्व सूचना भी दी जा चुकी है। हालांकि, सरकार की ओर से अभी तक कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली है, जिससे कार्यकर्ताओं में निराशा है। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता लंबे समय से अपनी सेवाओं के बदले उचित मानदेय और सामाजिक सुरक्षा की मांग कर रही हैं। उनका कहना है कि वे विभिन्न सरकारी योजनाओं के सफल क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, विशेषकर बच्चों और महिलाओं के स्वास्थ्य और पोषण के क्षेत्र में। इसके बावजूद, उन्हें अब तक सरकारी कर्मचारी के तौर पर मान्यता नहीं मिली है। यह उपेक्षा उनके मनोबल को तोड़ने वाली है और उन्हें अपने अधिकारों के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर कर रही है। कार्यकर्ताओं ने सरकार से अपील की है कि वह उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करे और जल्द से जल्द समाधान निकाले, ताकि वे बिना किसी अतिरिक्त चिंता के अपना कार्य सुचारू रूप से कर सकें।