वारिस के अभाव में बैंकों में दस लाख करोड़ से ज्यादा रुपये पड़े हैं, क्योंकि जीवित रहते संबंधित लोगों ने वसीयत नहीं की। अगर वसीयत की तो उसे साझा नहीं किया। लिहाजा, आगामी पीढ़ी को जीवनभर की जमापूंजी हस्तांतरण के लिए समय से वसीयत जरूर करें। शनिवार को द इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईसीएआई) की बरेली शाखा के दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन संवाद के पहले दिन ये सुझाव सीए पंकज शाह ने दिए। उन्होंने कहा कि अगर वसीयत होती तो यह रुपया भावी पीढि़यों के पास पहुंचता। आयकर के प्रावधान के अनुसार टैक्स देयता के बारे में भी जानकारी दी। कहा कि बैंक खाते में एक रुपये हो चाहे छोटी सी दुकान हो, उसकी वसीयत जरूरी है। इससे न्यायिक विवाद थमेंगे। इससे पूर्व सीए कपिल गोयल ने आयकर अधिनियम, 1961 के तहत आरोपित आय, विधिक कल्पना विषय पर व्याख्यान दिया। न्यायिक निर्णय जैसे उदाहरणों से जटिल विषय को समझाया। सत्र की अध्यक्षता क्रमश: सीए रविंद्र अग्रवाल, सीए राजीव अग्रवाल ने की।