बरेली में खानकाह आलिया नियाजिया में सोमवार की रात मन्नतों के चिराग जले। कोने-कोने में सौहार्द की रोशनी से खानकाह दमक उठी। महबूब-ए-इलाही की शान में कव्वालों ने कलाम पेश किए। इस रूहानी मंजर के बीच मजारों पर मन्नत-ओ-मुराद का दौर जारी रहा। ढाई सौ साल पुरानी परंपरा आज भी बदस्तूर जारी है। हजरत गौस पाक के नाम से होने वाले जश्न-ए-चिरांगा का नजारा इस बार भी यादगार रहा। हर मजहब व मिल्लत के लोग इसमें शामिल हुए। इससे पहले सज्जादानशीन शाह मेहंदी मियां ने चिराग रोशन किया। इसके बाद चिराग बांटने का सिलसिला शुरू हुआ जो देर रात तक चलता रहा।