केडी सिंह बाबू स्टेडियम आज सिर्फ एक खेल का मैदान नहीं, बल्कि उभरते क्रिकेट सितारों की नर्सरी बन चुका है। इसी स्टेडियम से प्रशिक्षण लेकर आईपीएल तक का सफर तय करने वाले विप्रज निगम अब यहां के युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बन चुके हैं। उनके शानदार प्रदर्शन ने यहां प्रशिक्षण ले रहे बच्चों में आत्मविश्वास और समर्पण की एक नई लहर पैदा की है। स्टेडियम में वर्तमान में 120 बालक-बालिकाएं क्रिकेट के गुर सीख रहे हैं, जिनकी उम्र 8 से 18 वर्ष के बीच है। सालाना मात्र 160 रुपये की फीस पर उन्हें क्रिकेट की पेशेवर ट्रेनिंग मिल रही है। अनुभवी कोच मयंक द्विवेदी के मार्गदर्शन में यहां खिलाड़ियों को कैचिंग, बल्लेबाजी, गेंदबाजी, रनिंग बिटवीन द विकेट्स, योगाभ्यास, फील्डिंग तकनीक, टीम वर्क और मानसिक मजबूती जैसे खेल के हर पहलू की गहन जानकारी दी जाती है। इस स्टेडियम में तैयार हो रहे खिलाड़ी अब देश के विभिन्न राज्यों की टीमों में अपनी प्रतिभा का जलवा बिखेर रहे हैं। उदाहरण के तौर पर, यहीं से प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके सार्थक उत्तराखंड की अंडर-19 टीम का हिस्सा हैं, जबकि सार्थक भारद्वाज तमिलनाडु की टीम से खेल रहे हैं। स्टेडियम का माहौल हर शाम बच्चों की दौड़, गेंद की टप्पा और कोच की गूंजती आवाजों से जीवंत हो उठता है। यह स्थान अब केवल प्रशिक्षण का केंद्र नहीं, बल्कि एक ऐसी 'क्रिकेट पाठशाला' बन चुका है, जहां से भविष्य के कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी निकलने की उम्मीद की जा रही है। केडी सिंह बाबू स्टेडियम अब खुद में एक प्रेरक गाथा है। जहां से निकलकर विप्रज निगम जैसे खिलाड़ी क्रिकेट के बड़े मंच पर चमक रहे हैं और उनके पदचिन्हों पर चलने को तैयार हैं सैकड़ों नए सितारे।