आमतौर पर सायरन बजाती बोलेरो और फर्राटा भरती बाइक पर नजर आने वाली पुलिस बाराबंकी में शनिवार को अचानक साइकिलों पर दिखाई दी तो लोग ठिठक गए। असंद्रा थाना क्षेत्र में यह नजारा किसी पुराने दौर की याद जैसा था। खाकी वर्दी पहने दरोगा और सिपाही जब कतार बनाकर साइकिल से बाजारों और गांवों की गलियों से गुजरे तो राहगीर भी कौतूहल से उन्हें देखते रह गए। प्रभारी निरीक्षक आलोक मणि त्रिपाठी के नेतृत्व में असंद्रा पुलिस ने ईंधन बचाने और आमजन से सीधे संवाद बढ़ाने के उद्देश्य से साइकिल गश्त शुरू की। थाने की बोलेरो और बाइक को छोड़ पुलिसकर्मी सुबह साइकिलों पर सवार होकर असंद्रा बाजार पहुंचे। वहां दुकानदारों, राहगीरों और स्थानीय लोगों से रुक-रुककर बातचीत की गई। लोगों से सुरक्षा, यातायात और बाजार की समस्याओं के बारे में जानकारी ली गई। इसके बाद पुलिस टीम हैदरगढ़-रामसनेहीघाट मार्ग होते हुए नई सड़क कस्बे तक पहुंची। रास्ते भर यह साइकिल गश्त लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी रही। बच्चे पुलिस को साइकिल पर देखकर मुस्कुराते नजर आए तो बुजुर्गों ने भी इस पहल की सराहना की। कई जगह लोगों ने पुलिसकर्मियों को रोककर बातचीत की और क्षेत्र की छोटी-बड़ी समस्याएं बताईं। नई सड़क कस्बे में सड़क किनारे ठेले और अस्थायी अतिक्रमण लगाए लोगों को पुलिस ने समझाइश दी। इस दौरान सड़क किनारे करीब आधा दर्जन अतिक्रमण चिन्हित किए गए। पुलिस ने दुकानदारों और ठेला संचालकों से कहा कि सड़क पर कब्जा होने से राहगीरों और वाहनों को परेशानी होती है, इसलिए व्यवस्था बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है। इस साइकिल गश्त की सबसे दिलचस्प बात यह रही कि वाहन पर रहने वाली पुलिस की तुलना में साइकिल पर निकले पुलिसकर्मी लोगों के ज्यादा करीब नजर आए। जहां-जहां टीम रुकी, वहां लोगों ने सहज होकर अपनी बातें रखीं। कई ग्रामीणों ने कहा कि पहली बार पुलिस इतनी शांति और आराम से गांव-गांव घूमती दिखाई दी। प्रभारी निरीक्षक आलोक मणि त्रिपाठी ने बताया कि प्रधानमंत्री द्वारा ईंधन बचाने की अपील के बाद यह पहल की गई है। उन्होंने कहा कि सामान्य गश्त यदि साइकिल से की जाए तो पुलिस न केवल ईंधन की बचत कर सकती है, बल्कि आमजन के बीच पहुंचकर उनकी समस्याओं को भी करीब से समझ सकती है। असंद्रा पुलिस की यह अनोखी साइकिल गश्त पूरे दिन क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी रही। लोग इसे पुलिस और जनता के बीच दूरी कम करने की सकारात्मक पहल मान रहे हैं।