प्रधानमंत्री बाल पुरस्कार लेकर दिल्ली से लखनऊ पहुंचीं बाराबंकी की बेटी पूजा पाल एयरपोर्ट पर कदम रखते ही भावुक हो गईं। जैसे ही वह टर्मिनल से बाहर निकलीं, जिला प्रशासन की ओर से भेजी गई टीम और अमर उजाला के प्रतिनिधियों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। फूलों के गुलदस्ते और शुभकामनाओं के बीच पूजा की आंखों में खुशी और गर्व साफ झलक रहा था। अमर उजाला से बातचीत में पूजा ने कहा, “जब दिल्ली में मंच पर नाम पुकारा गया तो यकीन नहीं हुआ। आज अपने राज्य और जिले में लौटकर जो सम्मान मिल रहा है, उससे दिल भर आया है।” पूजा ने आगे कहा, “यह पुरस्कार सिर्फ मेरा नहीं है। मेरे माता-पिता, मेरे गुरुजी और मेरे स्कूल ने मुझे यहां तक पहुंचाया है।” पूजा ने यह भी कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हाथों सम्मान मिलना उसके जीवन का सबसे बड़ा पल है, जिसे वह कभी नहीं भूल पाएगी। “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात करके मुझे लगा कि मेरी मेहनत सच में देखी और समझी गई है,” पूजा ने मुस्कराते हुए कहा। एयरपोर्ट पर मौजूद प्रशासनिक अधिकारियों ने इसे बाराबंकी के लिए गौरव का क्षण बताया। स्वागत के दौरान पूजा के पिता पुतीलाल भी भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि उनकी बेटी ने जो सम्मान पाया है, वह पूरे जिले की पहचान बन गया है। बाल पुरस्कार जीतकर लौटी पूजा का यह स्वागत सिर्फ एक बच्ची का अभिनंदन नहीं था, बल्कि यह संदेश भी था कि मेहनत, प्रतिभा और सही मार्गदर्शन से गांव-कस्बों की बेटियां भी देश के सबसे बड़े मंच तक पहुंच सकती हैं।