जयप्रकाश नगर क्षेत्र के जयप्रकाश नगर के दलजीत टोला स्थित नवनिर्मित हनुमान मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा के लिए छह दिवसीय श्री हनुमत प्राण प्रतिष्ठा महायज्ञ की शुरुआत शुक्रवार को किया गया। मंदिर परिसर से भवन टोला गंगा घाट के लिए कलश यात्रा निकाली गई। जिसमें हाथी, ऊंट-घोड़ा व सैकड़ो पुरुष व महिलाओं ने सहभागिता की। गंगा तट पर विधि विधान से पूजन-अर्चन के बाद कलश में गंगाजल भरकर सभी भक्तगण वापस मंदिर पहुंचे। इस दौरान हनुमान जी के जयकारों से क्षेत्र भक्तिमय हो गया। कार्यक्रम की शुरुआत दलजीत टोला स्थित हनुमान मंदिर से कलश यात्रा के साथ हुई। जल यात्रा में सैकड़ो पुरुष व महिलाओं के साथ हाथी, ऊंट और सैकड़ों घोड़े के आकर्षण का केंद्र रहे। भक्ति गीतों और जयकारों के बीच श्रद्धालु बाबू के डेरा चट्टी, जयप्रकाश नगर, पूर्वी भवन टोला होते हुए भवन टोला के पवित्र गंगा नदी तट पहुंचे। वहां आचार्यो के मंत्रोच्चार के साथ गंगा जल भरकर यात्रा टिपुरी, भगवान टोला, सेवा धाम मंदिर और चाचा टोला मार्ग से पुनः मंदिर परिसर पहुंची। मार्ग में जगह-जगह ग्रामीणों ने पुष्पवर्षा कर और जलपान कराकर भक्तगणों का स्वागत किया। पूजा-अर्चना का संचालन आचार्य ओमप्रकाश चौबे, संजय चौबे, वीरेंद्र चौबे, सोनू चौबे, सुशील चौबे, मनीष चौबे, प्रांजल चौबे, आशीष पाठक, अभिजीत पाठक, छोटेलाल पाठक, मिथिलेश पाठक, रामबहादुर पाठक और रोहित पाठक सहित अन्य विद्वानों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ संपन्न कराया। गंगा जल से भगवान हनुमान का अभिषेक होते ही मंदिर परिसर जय श्री राम और बजरंगबली की जय के जयघोष से गूंज उठा। कार्यक्रम में संतोष सिंह, नन्दजी यादव, बीरबल यादव, नन्दलाल यादव, विक्की सिंह, जनार्दन सिंह, रत्नेश सिंह, रामकुमार यादव, पवन यादव सहित अनेक गणमान्य नागरिकों मौजूद रहे। समाजसेवी सूर्यभान सिंह अपने सहयोगियों अरुण सिंह और मिंटू सिंह के साथ जल यात्रा में शामिल हुए। आयोजक एवं व्यवस्थापक राम बाबू राम रहे। जबकि संयोजन में ग्राम पंचायत के सभी सम्मानित ग्रामवासी सक्रिय रूप से जुड़े रहे। कई ग्राम प्रधान और जनप्रतिनिधियों की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। वक्ताओं ने कहा कि राम बाबू राम द्वारा कराया गया यह आयोजन ऐतिहासिक है। सुरक्षा व्यवस्था के तहत जयप्रकाश नगर चौकी प्रभारी मयंक कुमार, कांस्टेबल विजय यादव, निलेश शर्मा और अखिलेश गुप्ता और चांद दियर चौकी प्रभारी श्याम प्रकाश मिश अपने पुलिस बल के साथ मुस्तैदी से तैनात रहे। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि सामाजिक एकता और सामूहिक सहयोग की मिसाल भी पेश किया।