'हर घर बिजली' का वादा तेजवापुर ब्लॉक के दुंद्दीपुरवा गांव में खोखला साबित हो रहा है। ग्राम पंचायत सरपतहा के इस मजरे में सौभाग्य योजना के तहत 6 साल पहले 36 घरों में बिजली मीटर लगा दिए गए, लेकिन बलवापुर पावर हाउस से जुड़ी लाइन में आज तक करंट नहीं दौड़ा। हालात ये हैं कि बिना एक यूनिट खपत के हर महीने 200 से 400 रुपये का बिल ग्रामीणों के घर पहुंच रहा है। गांव के लोग बताते हैं कि पोल-तार सब लग गए, मीटर भी टंग गए। लगा कि अब अंधेरा दूर होगा। मगर 6 साल से इंतजार ही कर रहे हैं। लालटेन के सहारे बच्चे पढ़ते हैं, मोबाइल चार्ज कराने 1 किलोमीटर दूर हमीरपुर चौराहा जाना पड़ता है। गर्मी में पंखा-कूलर नहीं चलता, सांप-बिच्छू का डर अलग। बिजली न होने से गांव में आटा चक्की, सिलाई जैसे छोटे काम भी शुरू नहीं हो पा रहे। 70 वर्षीय सुन्दारा कहती हैं, "टीवी पर सुनते हैं सब घर रोशन हो गए। हमारे घर 6 साल से मीटर टंगा है, पर बल्ब नहीं जला।" युवक रामराज का कहना है, "डिजिटल इंडिया की बात होती है, यहां फोन चार्ज तक नहीं होता।" सत्यवती ने बताया कि "बिना बिजली जलाए ही 20 हजार रुपए का बकाया बिल भेज दिया गया है।" ग्रामीणों का आरोप है कि बलवापुर पावर हाउस के जेई से लेकर डीएम, एसडीओ और स्थानीय विधायक तक को कई बार प्रार्थना पत्र दिए। हर बार सिर्फ 'दिखवाते हैं' का आश्वासन मिला। सवाल यही है कि जब मीटर लगा, लाइन खिंची, तो बलवापुर पावर हाउस से सप्लाई क्यों नहीं चालू हुई? बिना बिजली के बिल भेजना विभाग की संवेदनहीनता दिखाता है। अब ग्रामीणों का सब्र टूट रहा है। उन्होंने 7 दिन में बिजली आपूर्ति शुरू न होने पर XEN कार्यालय पर अनिश्चितकालीन धरने की चेतावनी दी है। साथ ही मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत की तैयारी है। इस संबंध में एसडीओ नानपारा ने बताया कि "गांव में इतने सालों से बिजली नहीं जली है, इसकी जांच कराई जाएगी। बलवापुर पावर हाउस से जुड़ी तकनीकी दिक्कत देखकर उपभोक्ताओं को शीघ्र बिजली मिल सके, इसके इंतजाम किए जाएंगे।" यह मामला सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। जब 6 साल में 36 घर रोशन नहीं हो सके, तो 'विकसित भारत' के दावे कितने सच्चे हैं?