(मनोज तिवारी, बहराइच)। हरखापुर के त्रिमुहानी गांव के किनारे बहने वाले भगहर नाले में पर्याप्त मात्रा में मछली पायी जाती है। यह नाला जंगल से होकर ग्रामीण क्षेत्रों में आया है जिसका एक तरफ का किनारा कतर्नियाघाट के निशानगाड़ा सुजौली धर्मापुर वन क्षेत्र की सीमा है तो वहीं दूसरी तरफ आधा दर्जन ग्रामो का किनारा है और यह नाला ग्राम समाज की भूमि पर बह रहा है। इस नाले में मछली आखेट का ठेका प्रतिवर्ष मछुवारा सहकारी समितियों को जिला पंचायत द्वारा नीलामी कर दिया जाता है। लेकिन नाले के किनारे बसे लोगों द्वारा चोरी चुपके रात में जाल लगाकर मछली का शिकार बड़े पैमाने पर किया जाता है। एक तरफ आबादी तथा ग्रामीणों का खेत होने के कारण चोरी चुपके शिकार करने वाले लोग नाला पार करके नाले के उस पार लगी बड़ी बड़ी झाड़ियों में बैठकर चोरी से मछली का शिकार आये दिन करते हैं और नाले की रखवाली करने वाले लोगों के गस्त के दौरान शिकारी झाड़ियों का फायदा उठाते हुए कुछ दूरी पर जंगल होने के कारण जंगल में भाग जाते हैं। जिससे कुछ लोगों द्वारा यह आशका भी जताई जा रही है कि कहीं युवक मछली के शिकार के लिए नाले के उस पार तो नहीं गया था जहां पर झाड़ियों में बैठे बाघ ने युवक को मौत के घाट उतार दिया हो। जबकि परिजनों द्वारा शौच जाने की बात कही जा रही है घटनास्थल जंगल के बाहर होने के कारण मुआवजा तो मिलना तय है।