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रुपईडीहा में श्रीराम कथा में सीता विदाई और माताओं की मुंह दिखाई प्रसंग का हुआ वर्णन

बहराइच के रुपईडीहा स्थित धर्मशाला में श्रीराम कथा का आयोजन चल रहा है। शनिवार के प्रसंग में कथा वाचिका मंजूलता ने माता सीता की विदाई तथा अयोध्या पहुंचने पर तीनों माताओं द्वारा मुंह दिखाई की परंपरा का अत्यंत भावपूर्ण और मार्मिक वर्णन किया। इस प्रसंग को सुनकर श्रद्धालु भावुक हो उठे। कथा वाचिका ने बताया कि विवाह के पश्चात जब माता सीता की विदाई हुई, तब जनकपुरी का वातावरण भावनाओं से भर गया। राजा जनक और माता सुनयना सहित समस्त नगरवासी इस पल में भावुक हो उठे। यह प्रसंग बेटी के प्रति माता-पिता के स्नेह और विदाई की संवेदनाओं को दर्शाता है। इसके पश्चात अयोध्या आगमन पर माता कौशल्या, माता कैकेयी और माता सुमित्रा द्वारा माता सीता की मुंह दिखाई की रस्म का वर्णन करते हुए कथा वाचिका ने बताया कि तीनों माताओं ने प्रेम और स्नेह से सीता का स्वागत किया। यह प्रसंग पारिवारिक संस्कार, अपनापन और नई बहू के सम्मान का प्रतीक है। कथा वाचिका ने अपने प्रवचन में कहा कि राम-सीता का जीवन हमें पारिवारिक मूल्यों, सम्मान और प्रेम के साथ जीवन जीने की प्रेरणा देता है। कथा के माध्यम से श्रोताओं को यह संदेश दिया गया कि परिवार में स्नेह, सम्मान और संस्कार का विशेष महत्व होता है। कथा के दौरान श्रद्धालु भक्ति रस में डूबे नजर आए और पूरा वातावरण जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा। इस अवसर पर रतन अग्रवाल, चेयरमैन डॉ. उमाशंकर वैश्य, अनिल अग्रवाल, सुशील बंसल, बलराम मिश्रा, कृष्णामोहन सिंह, रामचंद्र अग्रवाल, सीताराम अग्रवाल, बंटी अग्रवाल, नरेश मित्तल, महेश मित्तल, गोपाल अग्रवाल, रामकुमार वर्मा सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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