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रुपईडीहा में 100 रुपये की लिमिट से भारत-नेपाल सीमा पर बढ़ी परेशानी, व्यापार और रिश्तों पर असर

बहराइच के रुपईडीहा में भारत-नेपाल सीमा पर आवागमन करने वाले नेपाली नागरिकों के लिए नेपाल सरकार द्वारा लागू की गई 100 रुपये मूल्य सीमा का नियम अब सीमावर्ती क्षेत्रों में परेशानी का कारण बनता जा रहा है। स्थानीय व्यापारियों, बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े लोगों तथा आम नागरिकों का कहना है कि इस नियम का सीधा असर सीमा पार के व्यापार, पर्यटन और सामाजिक संबंधों पर दिखाई देने लगा है। सीमावर्ती बाजार रुपईडीहा में पहले की तुलना में नेपाली ग्राहकों की संख्या काफी कम देखी जा रही है। व्यापारियों का कहना है कि जब बाजार में खरीदारी कम होगी तो उसका प्रभाव बैंकिंग गतिविधियों पर भी पड़ेगा। बैंकों में नकद जमा और लेनदेन प्रभावित होने लगे हैं। नेपालगंज से सीमा पार कर रूपईडीहा पहुंचे रितेश खड़का और सोम थापा ने बताया कि 100 रुपये में आज के समय में कुछ भी खरीद पाना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार को आम लोगों की आर्थिक स्थिति और दैनिक जरूरतों को देखते हुए इस सीमा को कम से कम 5000 रुपये तक बढ़ाना चाहिए। उनका कहना था कि पूर्व की सरकारों ने ऐसे नियमों में व्यवहारिकता अपनाई थी, जिससे आम लोगों को दिक्कत नहीं होती थी। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस नियम से पर्यटन गतिविधियां भी प्रभावित हो रही हैं। वहीं भारत और नेपाल के बीच वर्षों पुराने सामाजिक एवं पारिवारिक रिश्तों पर भी इसका असर पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि सीमा पार रहने वाले रिश्तेदार अब अपने परिजनों के लिए छोटी-मोटी जरूरत की वस्तुएं भी आसानी से नहीं ले जा पा रहे हैं। समाजसेवी तेजप्रसाद वर्मा ने कहा कि भारत और नेपाल दोनों देशों की सरकारों को मिलकर इस समस्या का व्यावहारिक समाधान निकालना चाहिए, ताकि सीमावर्ती क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था और दोनों देशों के पारंपरिक संबंध प्रभावित न हों।

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