भरथापुर नौका हादसे के पीड़ित परिवारों के पुनर्वास की कवायद शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा एक माह के भीतर विस्थापितों को बसाने की घोषणा के बाद प्रशासन ने तत्परता दिखाते हुए सेमरहना गांव में 1.704 हेक्टेयर भूमि का चयन किया है। इसी भूमि पर 118 परिवारों के लिए सभी मूलभूत सुविधाओं से युक्त कॉलोनी बसाई जाएगी।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश के बाद बहराइच प्रशासन ने जंगल क्षेत्रों से विस्थापित परिवारों को बसाने की दिशा में ठोस कदम उठाया है। मुख्यमंत्री ने मोतीपुर की सिंचाई कॉलोनी में पीड़ित परिवारों से मुलाकात के दौरान आश्वासन दिया था कि सभी प्रभावितों को सुरक्षित और सुविधायुक्त स्थान पर बसाया जाएगा। इसी क्रम में गुरुवार को जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी ने संभावित स्थलों का निरीक्षण किया था।
निरीक्षण के बाद राजस्व और तहसील प्रशासन ने सेमरहना गांव की भूमि को सबसे उपयुक्त माना। शुक्रवार को जिलाधिकारी ने इस भूमि पर अंतिम स्वीकृति दे दी। निर्णय के तुरंत बाद जमीन के समतलीकरण और सफाई का कार्य शुरू कर दिया गया। यह स्थान नानपारा–लखीमपुर राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे स्थित है, जिससे बाजार, विद्यालय और स्वास्थ्य सेवाओं की सुविधाएं आसानी से उपलब्ध होंगी।
प्रशासन की योजना के अनुसार कॉलोनी में सड़क, बिजली, जलापूर्ति, स्वच्छ पेयजल, शौचालय, स्वास्थ्य केंद्र और सामुदायिक भवन जैसी सभी मूलभूत सुविधाएं विकसित की जाएंगी। प्रत्येक परिवार को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्का मकान, भूमि का पट्टा और बिजली कनेक्शन प्रदान किया जाएगा।
डीएम अक्षय त्रिपाठी ने सभी विभागों को एक माह के भीतर कार्य पूरा करने के निर्देश दिए हैं और सीडीओ, एसडीएम तथा राजस्व टीम को नियमित मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी सौंपी है।
भरथापुर के विस्थापित परिवारों में इस निर्णय से राहत और उम्मीद की लहर है। लंबे समय से पुनर्वास की प्रतीक्षा कर रहे ग्रामीण अब अपने स्थायी घर के सपने को साकार होते देख रहे हैं। चयनित भूमि क्षेत्र में जिन ग्रामीणों के मकान पहले से मौजूद हैं, वे वहीं पर बसे रहेंगे।