तमसा के घाट शुक्रवार को एक बार फिर दीपों की रोशनी से जगमगा उठे। देव दीपावली पर ऐसा लगा जैसे आसमां के तारे जमीं पर उतर आए हों। देव दीपावली के पर्व को लेकर गजब का उत्साह हर किसी में दिखाई दिया।अंधेरा होते ही जनपद के घाट दीपों की आभा से जगमगा उठे।ऐसा लगा जैसे देवताओं की दीपावली के अवसर पर मां तमसा ने दीपों का चंद्रहार पहन लिया हो। तमाम धार्मिक स्थलों पर दीपदान का आयोजन किया गया।तमसा तट पर असंख्य दीयों की टिमटिमाहट ने स्वर्गिक छटा बिखेर दी।दीपदान के लिए श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ पड़ा। इस विहंगम नजारे को लोग अपलक निहारते रहे।गौरतलब है कि कार्तिक पूर्णिमा को त्रिपुरारी पूर्णिमा भी कहा जाता है। महाभारत के कर्णपर्व में देव दिवाली की कथा को विस्तार से बताया गया है। देव दिवाली की कथा त्रिपुरासुर के वध से जुड़ी है। कार्तिक पूर्णिमा पर भगवान शिव ने त्रिपुरासुर का वध किया था। इस कारण से कार्तिक पूर्णिमा पर देवताओं ने खुश होकर दिवाली मनाई थी। तभी से कार्तिक पूर्णिमा को देव दिवाली कहा जाने लगा क्योंकि इसी दिन सभी देवता पृथ्वी पर आकर दिवाली मनाये थे।