राम मंदिर निर्माण कार्य को लेकर भवन निर्माण समिति की बैठक का आज तीसरा दिन रहा। समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने बैठक से पहले महत्वपूर्ण जानकारी दी। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण कार्य को लेकर लगातार बैठकों का दौर जारी है। राम मंदिर भवन निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने बताया कि बैठक में ध्वजारोहण समारोह को लेकर मुख्य रूप से चर्चा चल रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगमन और उनके कार्यक्रम को लेकर भी मंथन जारी है। समिति प्रधानमंत्री से अनुरोध करेगी कि वे ध्वजारोहण के साथ परकोटा और सप्त मंदिर को भी देखने और दर्शन करने के लिए समय निकालें। प्रधानमंत्री को मंदिर परिसर की म्यूरल्स और ऋषि-मुनियों के आश्रम स्वरूप सप्त मंदिर क्षेत्र के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी जाएगी। शहीद स्मारक के तौर पर निर्मित किया जाने वाला स्तंभ फरवरी 2026 तक बनकर होगा तैयार तैयारियों का मुख्य लक्ष्य है कि वर्ष 2025 में हर परिस्थिति में मंदिर परिसर पूर्ण रूप से तैयार हो जाए। राम मंदिर परिसर में अब सिर्फ दो प्रमुख कार्य शेष हैं, जिनमें शहीद स्मारक का निर्माण भी शामिल है। शहीद स्मारक के तौर पर निर्मित किया जाने वाला धातु का स्तंभ फरवरी 2026 तक बनकर तैयार हो जाएगा। इसके अलावा अस्थायी मंदिर को मेमोरियल के तौर पर संरक्षित रखा जाएगा, जहां सदैव दीपक प्रज्ज्वलित रहेगा। 23 नवंबर को मीडिया के लिए मंदिर परिसर खोला जा सकता है ताकि पत्रकार स्थल का अवलोकन कर सकें। मुख्य मंदिर में एक बार में पांच से आठ हजार श्रद्धालुओं के दर्शन की व्यवस्था नृपेंद्र मिश्र के अनुसार मुख्य मंदिर में एक बार में पांच से आठ हजार श्रद्धालुओं के दर्शन की व्यवस्था है। दर्शन मार्ग से दक्षिण द्वार से निकलने तक का समय करीब 20 मिनट अनुमानित है। जबकि सुग्रीव किला तक पूरा दर्शन मार्ग तय करने में श्रद्धालुओं को लगभग 40 मिनट लगेंगे। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए जूते-चप्पल रखने के तीन स्थल बनाए जा रहे हैं, जो परकोटे से सटे हुए होंगे।