श्री राम मंदिर निर्माण के बाद देशभर में उत्साह का माहौल है। इसी क्रम में कथावाचक इंद्रेश महाराज ने रामलला के दर्शन, अयोध्या के बदलते स्वरूप और सनातन धर्म की बढ़ती वैश्विक पहचान पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि 500 वर्षों की प्रतीक्षा के बाद रामलला के दर्शन का अवसर मिला है, जो अत्यंत भावुक क्षण है। इसे उन्होंने उस खुशी से जोड़ा, जैसे कोई बालक विदेश से लौटकर घर आता है और परिवार में उत्सव का माहौल बन जाता है। इंद्रेश महाराज ने अयोध्या के कायाकल्प की सराहना करते हुए कहा कि आज शहर भव्य और दिव्य दिखाई देता है, जहां आधुनिकता और परंपरा का सुंदर संगम है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि अयोध्या धार्मिक नगरी है और यहां श्रद्धा भाव से आना चाहिए, न कि केवल पर्यटन के दृष्टिकोण से। उन्होंने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री की प्रशंसा करते हुए कहा कि सनातन धर्म को नई पहचान मिली है। विदेशों में भी भारत की संस्कृति और परंपरा का प्रभाव बढ़ा है। उन्होंने संकेत दिया कि अब वृंदावन, मथुरा और काशी में भी इसी तरह विकास की अपेक्षा है।