अयोध्या में मांझा बरहटा स्थित वशिष्ठ गुरुकुल में शुक्रवार को नव प्रवेशित 100 से अधिक बटुकों का यज्ञोपवीत संस्कार संपन्न हुआ। मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे आरएसएस के अखिल भारतीय अधिकारी व विमर्श के राष्ट्रीय संयोजक मुकुल कानितकर ने कहा कि अंग्रेंजों की शिक्षा लागू होने से पहले भारत में सात लाख गुरुकुल थे। अंग्रेंजी शिक्षा को बढ़ावा मिलने से गुरुकुलों की संख्या तेजी से घटी, लेकिन अब एक बार फिर विश्व भर में गुरुकुलों की मांग बढ़ी है। इस समय 40 देशों में गुरुकुल संचालित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति और परंपरा की आधारशिला मानी जाने वाली गुरुकुल शिक्षा प्रणाली समय के साथ कई उतार-चढ़ाव से गुजरी है। अंग्रेजी शिक्षा प्रणाली के प्रसार के कारण एक समय गुरुकुलों की संख्या में भारी कमी आई, लेकिन अब बदलते शैक्षणिक दृष्टिकोण और भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रति बढ़ती रुचि के चलते गुरुकुल शिक्षा प्रणाली एक बार फिर वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना रही है। अंग्रेजी माध्यम आधारित विद्यालयों के विस्तार के साथ रोजगार उन्मुख शिक्षा को प्राथमिकता दी जाने लगी। इसके कारण गुरुकुलों में विद्यार्थियों की संख्या घटने लगी और कई प्राचीन गुरुकुल बंद हो गए।