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Video: अमेठी में पुलिस की कार्यशैली पर किसानों ने जताई चिंता, सौंपा ज्ञापन

भारतीय किसान यूनियन (राजनीतिक) ने मंगलवार को गौरीगंज रेलवे स्टेशन पर किसानों की एक बैठक आयोजित की। किसानों ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर चिंता व्यक्त की। संगठन के जिलाध्यक्ष हरीश सिंह चुन्नू ने कहा कि जनता और पुलिस के बीच विश्वास की कमी बढ़ रही है, जो लोकहित में नहीं है। इस मुद्दे पर संगठन ने पुलिस अधीक्षक को एक मांग पत्र सौंपा है। जिला अध्यक्ष ने किसानों ने पुलिस द्वारा दुर्व्यवहार, अवैध खनन में सहयोग और शिकायतों के फर्जी निस्तारण जैसी समस्याओं को उठाया है। उनका आरोप है कि जब ग्रामीण अपनी समस्या लेकर थाने जाते हैं, तो थाना प्रभारी या अन्य पुलिसकर्मी शिकायत पर ही संदेह जताते हुए अपमानजनक शब्दों का प्रयोग करते हैं। पीपपुर, संग्रामपुर, शुकुलबाजार और जगदीशपुर थानों से ऐसी शिकायतें प्राप्त हुई हैं। संगठन ने सुझाव दिया है कि थाने आने वाले फरियादियों से सम्मानजनक व्यवहार किया जाए और उनकी शिकायत पर तुरंत संदेह न जताया जाए। किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस खनन माफियाओं के साथ मिलकर अवैध खनन में सहयोग कर रही है। अवैध खनन में उपयोग होने वाले वाहनों से आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं। इस पर संगठन का सुझाव है कि जिस भी हल्का क्षेत्र में अवैध खनन पाया जाए, वहां के ग्राम पुलिस और हल्का सिपाही को कर्तव्य में लापरवाही के लिए दंडित किया जाए। इसके अतिरिक्त, थानों में तैनात कांस्टेबल द्वारा ग्रामीणों, विशेषकर महिलाओं और बुजुर्गों से अभद्र भाषा का प्रयोग करने और गाली-गलौज करने की शिकायतें भी सामने आई हैं। जमीनी विवादों में धन लेकर अवैध कब्जे में सहयोग करने और महिलाओं से अशिष्ट व्यवहार करने का भी आरोप है। संगठन ने निर्देश जारी करने का सुझाव दिया है कि कोई भी पुलिसकर्मी बिना राजस्व अधिकारी के किसी भी जमीन विवाद में मौके पर न जाए और न ही किसी न्यायालय के आदेश के बिना कोई कार्यवाही करे। सभी पुलिसकर्मी फरियादियों को सम्मान सूचक संबोधन का प्रयोग करें। किसानों का आरोप है कि आईजीआरएस पोर्टल पर की गई शिकायतों का फर्जी निस्तारण दिखाकर रिपोर्ट लगा दी जाती है, जबकि पीड़ित को अभी भी कार्यालयों और अदालतों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। संगठन ने सुझाव दिया है कि आईजीआरएस पोर्टल पर निस्तारित समस्याओं की समीक्षा और फीडबैक पुलिस अधीक्षक कार्यालय से समय-समय पर किया जाए। साथ ही, पुलिस अधीक्षक की निगरानी में हर माह किसानों और किसान प्रतिनिधियों के साथ बैठक आयोजित की जाए, ताकि जनता और पुलिस के बीच बेहतर संवाद और विश्वास कायम हो सके। संगठन को विश्वास है कि इन जनसमस्याओं पर गंभीरता से विचार कर पुलिसिंग व्यवस्था को सुधारा जाएगा।

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