अमेठी सिटी: साहब.. वर्ष 2014 में पट्टा मिला था। उसके बाद से लगातार लेखपाल और तहसील के चक्कर काट रहा हूं, कोई सुनवाई नहीं हो रही है। न ही कोई राजस्वकर्मी आज तक नापने गया और न ही कब्जा दिलाया गया। यह पीड़ा मुसाफिरखाना तहसील के दादरा निवासी रामचंद्र मौर्य ने गौरीगंज तहसील सभागार में संपूर्ण समाधान दिवस की सुनवाई कर रहे जिलाधिकारी संजय चौहान व पुलिस अधीक्षक सरवणन टी. से कहते हुए कब्जा दिलाने की मांग रखी। गौरीगंज निवासी विजय विश्कर्मा ने जिलाधिकारी को शिकायती पत्र देकर आरोप लगाया कि गांव के विपक्षी जबरन उनका शौचालय तोड़कर रास्ता बना लिए हैं। विपक्षियों के दबाव में न तो पुलिस कोई कार्रवाई कर रही है और न ही तहसील से। 50 से अधिक बार अफसरों की दौड़ लगा चुके हैं, न्याय मिलने के बजाय सिर्फ मुकदमा मिला। पचेहरी गांव निवासी संजना ने बताया कि उनके पिता की 21 दिसंबर 2025 को सीवान स्थित एक नलकूप में उतरे करंट की चपेट में आने से मौत हो गई थी। पोस्टमार्टम के दौरान विसरा सुरक्षित किया गया, करीब आठ माह बीतने को है, लेकिन अभी तक विसरा रिपोर्ट नहीं आई। जिससे आर्थिक सहायता नहीं मिल पा रही है। मुसाफिरखाना के रानीगंज निवासी सफीकुल निशा ने बताया कि तीन माह पूर्व उनके बेटे शईम की कादूनाला में डूबने से मौत हो गई थी। उसके बाद से वह आर्थिक सहायता के लिए तहसील व जिला मुख्यालय का चक्कर काट रहीं हैं, कोई सुनवाई नहीं हो रही है। 80 शिकायतों में सिर्फ आठ का निस्तारण गौरीगंज में दिवस के दौरान आईं कुल 26 शिकायतें में से तीन का मौके पर निस्तारण कराया गया। वहीं मुसाफिरखाना में 14 शिकायतों के सापेक्ष एक, अमेठी में 18 शिकायतों के सापेक्ष एक और तिलोई में आईं 22 शिकायतों में से तीन का निस्तारण किया गया। शेष शिकायतों के निस्तारण के लिए दिवसाधिकारियों ने पुलिस और राजस्व की संयुक्त टीमें गठित कर मौके पर भेजी हैं।