अमेठी में जिला अस्पताल में महिला चिकित्सक नहीं होने से महिला मरीजों और गर्भवतियों की परेशानी बढ़ गई है। ओपीडी से लेकर सिजेरियन तक की सेवाएं प्रभावित हैं। पिछले करीब 12 दिनों से संबद्ध महिला रोग विशेषज्ञ अवकाश पर हैं। ऐसे में इलाज के लिए आने वाली महिलाओं को बिना उपचार लौटना पड़ रहा है या फिर निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ रहा है। जिला अस्पताल में पहले सीएचसी की दो महिला रोग विशेषज्ञों की संबद्धता की गई थी। इनमें से डॉ. पुलक यादव की संबद्धता फरवरी में समाप्त कर उन्हें जगदीशपुर में नियमित तैनाती दे दी गई। इसके बाद डॉ. रुचिका सेठ सप्ताह में तीन दिन ओपीडी देख रही थीं। अस्पताल में प्रतिदिन 70 से 100 महिला मरीज पहुंचती हैं। दोनों चिकित्सकों की मौजूदगी में रोज तीन से चार सिजेरियन भी होते थे। महिला चिकित्सक के अवकाश पर जाने के बाद सामान्य जांच और उपचार तक प्रभावित हो गया है। अस्पताल पहुंचने वाली महिलाओं को निजी चिकित्सकों का सहारा लेना पड़ रहा है। गौरीगंज के पाठक का पुरवा निवासी सविता पाठक ने बताया कि महिला चिकित्सक नहीं मिलने पर अब निजी अस्पताल जाना पड़ रहा है। चंदईपुर की श्यामावती ने कहा कि सरकारी जांच के बाद भी निजी अस्पतालों में दोबारा जांच और दवाओं के नाम पर खर्च बढ़ जाता है। रामदासपुर बाहापुर की विजय लक्ष्मी ने बताया कि कई दिन से अस्पताल आ रहीं हूं। अब निजी अस्पताल जाना पड़ेगा। भटगवां की श्वेता मिश्रा ने बताया कि कई दिनों से अस्पताल के चक्कर लगा रही हैं, लेकिन महिला चिकित्सक नहीं मिल रहीं। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. बद्री प्रसाद अग्रवाल ने बताया कि महिला चिकित्सक की तैनाती के लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारी और शासन को पत्र भेजा गया है।