अधिकारियों की उदासीनता के कारण करोड़ों रुपये की लागत से बने 200 शैय्या मातृ एवं शिशु चिकित्सालय में महिला मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। अस्पताल में डॉक्टरों और स्टाफ की कमी के कारण यह अपनी पूरी क्षमता से संचालित नहीं हो पा रहा है। आलम यह है कि इसी परिसर के बगल में स्थित सीएचसी से भेजे गए डॉक्टरों के सहारे किसी तरीके से अस्पताल का संचालन किया जा रहा है। यह हाल तब है जब स्वास्थ्य निदेशालय के होप सेंटर से सीसीटीवी के जरिए इसकी निगरानी हो रही है। अस्पताल में रोजाना चार से पांच प्रसव कराए जाते हैं। वहीं, 200 से 250 तक मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं।