जैन धर्मावलंबियों ने सालभर में जाने-अनजाने में हुई गलतियों के लिए एक-दूसरे से क्षमा याचना की। जैन मुनियों ने बताया कि क्षमा शब्द मानवीय जीवन की आधारशिला है। जिसके जीवन में क्षमा है, वही महानता को प्राप्त कर सकता है। क्षमावाणी हमें झुकने की प्रेरणा देती है। दशलक्षण पर्व हमें यही सिख देता है कि क्षमावाणी के दिन हमें अपने जीवन से सभी तरह के बैर को मिटाकर प्रत्येक व्यक्ति से क्षमा मांगनी चाहिए। दूसरों को भी क्षमा करने का भाव है ही क्षमावाणी है।