अंतिम सोमवार को भगवान भोले नाथ को दूध, गंगा जल, पुष्प, धतूरा, भांग, इत्र, बेलपत्र, नैवेद्य, मिष्ठान्न, शमी, हल्दी, देसी घी, दही, चंदन का अर्पण कर आरती की गई। शिव महिम्न स्त्रोत, महामृत्युंजय जप, शिव चालीसा, सुंदरकांड, अखंड रामायण आदि के पाठ मंदिरों पर हो रहे हैं।