दिवाली पर मिट्टी का दीया जलाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। तमाम अत्याधुनिक लाइट, झालर और आर्टिफिशियल कैंडल के बावजूद मिट्टी के दीयों की मांग बरकरार है। दिवाली के मौके पर मिट्टी का दीया, बर्तन, कसोरा आदि मांग काफी बढ़ जाती है। समय के साथ इनकी कीमतें भी बढ़ रही हैं और बनाने वालों की संख्या भी तेजी से घट रही है। बावजूद इसके अलोपीबाग इलाके में कुम्हार परिवार के द्वारा पूरे साल मिट्टी के दीये और बर्तन बनाने का कार्य किया जाता है। इसमें क्या दिक्कतें और चुनौतियां हैं इस पर खास बातचीत की गई।