इसके बाद फिराक गोरखपुरी के साहित्यिक योगदान पर चर्चा शुरू हुई। इसमें प्रो. असलम, जामिया मिल्लिया इस्लामिया के प्रो. अहमद महफूज और इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्रो. हेरम्ब चतुर्वेदी, गीतकार यश मालवीय ने अपने अनुभवों के साथ किस्सागोई को साझा किया। प्रो. महफूज ने फिराक साहब की तुलना मिर्जा गालिब से की। कहा कि उनकी उर्दू शायरी, नज़्में, और रुबाइयां गजल की दुनिया में बेजोड़ हैं। इनके बाद प्रो. हेरम्ब चतुर्वेदी का कहना था कि फिराक अक्सर रातभर जागकर शायरी करते थे।