धीरेंद्र के दोनों पैर खराब हैं। वह रामघाट से 125 किमी दूर मथुरा तक चार लीटर की कांवड़ लेकर बम-बम भोले बोलते हुए आगे बढ़ते नजर आए। वह एक दिन में करीब 20-24 किलोमीटर का सफर तय कर लेते हैं। रास्ते में जहां भी मंदिर पड़ता है, वहां कांवड़ की कट्टियों को टांगकर रात्रि विश्राम करते हैं।