दिनभर श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का वृत रहने के बाद देर रात 12 बजे लगभग चांद निकलते ही मंदिर और घरों में पूजा, आरती होने लगी। चांद को अर्घ्य दिया गया और उसके बाद प्रसाद वितरण किया गया। तदोपरांत व्रत रखने वालों ने भोजन किया।
11 September 2026
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