फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

VIDEO: संक्रमण से बच्चेदानी बीमार, बार-बार गर्भपात से बांझपन

बच्चेदानी में बढ़ते संक्रमण से भी महिलाओं की कोख सूनी रह रही है। बच्चेदानी भ्रूण का भार नहीं सह पा रही। बार-बार गर्भपात हो रहा है। बांझपन से जूझ रही 15 फीसदी महिलाओं में यही वजह मिल रही है। फतेहाबाद रोड स्थित होटल में एकेडमी ऑफ क्लीनिकल एम्ब्रियोलॉजिस्ट की कार्यशाला के अंतिम दिन डॉक्टरों ने इस पर चिंता जताई। ऑब्स एंड गाइनी सोसाइटी की सचिव प्रो. मीनल जैन ने बताया कि 15-20 दंपती बांझपन से जूझ रहे हैं। इसमें शुक्राणुओं और अंडाणुओं कम बनना, खराब गुणवत्ता समेत अन्य वजह है। इसमें एक वजह बच्चेदानी कमजोर होना भी है। इसे चिकित्सकीय भाषा में एंडोमेट्रियल रिसेप्टिविटी बोलते हैं। यह असुरक्षित यौन संबंध, बच्चेदानी में टीबी, रसौली समेत अन्य वजहों से हो सकता है। राहत की बात है कि इलाज कराने से 30-40 फीसदी की ये परेशानी दूर हो जाती है। आयोजन सचिव डॉ. केशव मल्होत्रा ने बताया कि बांझपन में महिला-पुरुषों की संख्या लगभग बराबर ही है। पुरुषों की संख्या अब बढ़ रही है। इसकी बड़ी वजह धूम्रपान, अल्कोहल, तनाव, मोटापा और देर से शादी करना है। इससे शुक्राणुओं की संख्या और गुणवत्ता दोनों ही प्रभावित हो रही हैं। यही स्थिति महिलाओं में है, इनमें भी 30-32 की उम्र में शादी और बच्चों के लिए दो-तीन साल बाद के चलन से बांझपन बढ़ा है। कार्यशाला के समापन पर सभी को प्रमाणपत्र दिए गए। कार्यशाला में संस्था अध्यक्ष डॉ. गौरव मजूमदार, डॉ. सुनीता रामाकृष्णनन, डॉ. परशुराम गोपीनाथ, डॉ. जयदीप मल्होत्रा, डॉ. नरेंद्र मल्होत्रा, डॉ. रजनी पचौरी, डॉ. अनुपम गुप्ता, डॉ. किया पाराशर, डॉ. सुधा बंसल आदि मौजूद रहे।

विज्ञापन

Latest

Recommended

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
AU ऐप में पढ़ें