नगर कीर्तन का एक मुख्य आकर्षण गतका रहा। संत सिपाही रंजीत अखाड़ा के नौजवानों ने प्राचीन युद्ध कला का प्रदर्शन किया। 10 फीट की तलवार, चक्र, कांटेदार गोला, खंजर, भाला, अग्निचक्र, लाठी-तीरकमान के साथ करतब देख लोग अचंभित हो गए। कोहनी पर रखे नारियल को हथौड़े से फोड़ा तो लोग दांतों तले अंगुली दबा लिए। बच्चों से बुजुर्ग तक ने युद्ध कौशल दिखाया। इसकी तैयारी संत बाबा प्रीतम सिंह की अगुवाई में हुई। जत्थेदार राजेंद्र सिंह इंदौलिया ने सिपाहियों को प्रोत्साहित किया। नगर कीर्तन यात्रा की 20 से अधिक झांकी भी शामिल रहीं। इसमें श्रीगुरु गोविंद सिंह और उनके साहिबजादे, सिख धर्म के गुरुओं, तितली वाली झांकी आकर्षण का केंद्र रही। इनको निहारते हुए लोग फोटो और सेल्फी खींच रहे थे। स्वच्छता, जल संरक्षण समेत सामाजिक दायित्वों का महत्व भी बताया गया।