संबंध बनाए और गर्भ ठहर गया तो मेडिकल स्टोर से गर्भपात की दवा मंगवाकर खा ली। बार-बार ऐसा करने से कोख (बच्चेदानी) में संक्रमण हो रहा है। इससे महिलाओं की गोद सूनी रह रही है। एसएन मेडिकल कॉलेज के स्त्री रोग विभाग के अध्ययन में पता चला है कि 35 फीसदी महिलाएं बांझपन से जूझ रही हैं। इसमें गर्भपात की दवाएं बड़ी वजह बनती जा रही हैं। एसएन मेडिकल कॉलेज के स्त्री रोग विभाग की डॉ. रुचिका गर्ग ने बताया कि 28-35 साल की महिलाएं बांझपन से जूझ रही हैं। 1,152 महिलाओं पर किए गए अध्ययन में 40 फीसदी में अंडाणुओं की कमी, 18-20 फीसदी में नली बंद मिलने और 40 फीसदी में पुरुषों में शुक्राणुओं की कमी वजह मिली। बांझपन में गर्भपात की दवाएं, फास्टफूड, मिलावटी भोजन, खराब दिनचर्या, मोटापा, देर से शादी जैसी वजहें भी सामने आईं। पीड़ित महिलाओं में से 52 फीसदी ने माना कि उन्होंने गर्भपात दवाओं का खुद से तीन से अधिक बार उपयोग किया। इससे बच्चेदानी में संक्रमण, मासिक धर्म भी गड़बड़ा गया। टीबी की गांठ भी बन गई। इससे गर्भधारण करने में दिक्कत आई और गोद सूनी रह गई।