आगरा में तीर्थराज बटेश्वर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा की कलश यात्रा में बृहस्पतिवार को श्रद्धा और आस्था का ऐसा नजारा देखने को मिला, जिसने हर किसी को मंत्रमुग्ध कर दिया। कलश यात्रा में उमड़े श्रद्धालुओं के सैलाब के बीच एक बाबा कौतूहल का केंद्र बने रहे। अपनी जटाओं पर रुद्राक्षों से भव्य शिवलिंग की आकृति सजाए और हाथ में डमरू थामे शिव धुन में मग्न यह बाबा लायक भारती थे। पंच दशनाम आवाहन अखाड़ा काशी से जुड़े 62 वर्षीय पुजारी बाबा लायक भारती ने अपनी अनूठी साधना के बारे में बताया कि यह कोई साधारण साज-सज्जा नहीं, बल्कि महादेव के प्रति मेरी अटूट आस्था है। प्रयागराज महाकुंभ के दौरान मैंने अपनी जटाओं के ऊपर पूरे 2100 रुद्राक्षों को पिरोकर इस भव्य शिवलिंग की आकृति को धारण करने का संकल्प लिया था।कलश यात्रा के दौरान जब बाबा डमरू बजाते हुए शिवभक्ति में झूम रहे थे, तो वहां मौजूद हर श्रद्धालु उनके इस अद्भुत रूप को मोबाइल में कैद करने के लिए लालायित दिखे। आमतौर पर अखाड़े के बाबाओं को सांसारिक मोह-माया से विरक्त माना जाता है, लेकिन बाबा लायक भारती की कहानी थोड़ी अलग और दिलचस्प है। बाबा ने बताया कि वह गृहस्थ जीवन में हैं। उनका पूरा परिवार है। बच्चे और नाती-पोतों से भरा-पूरा हंसता-खेलता संसार है। पारिवारिक जिम्मेदारियों को बखूबी निभाते हुए भी उनकी शिव भक्ति में कभी कोई कमी नहीं आई। बाबा लायक भारती मूल रूप से आगरा के रामबाग स्थित नगला बालचंद के रहने वाले हैं। वर्तमान में वह लंबे समय से तीर्थराज बटेश्वर के शिव शक्ति आश्रम में रह रहे हैं। आश्रम के महंत बटेश्वर भारती महाराज के सानिध्य में अपनी सेवा और साधना को आगे बढ़ा रहे हैं।