प्रयागराज महाकुंभ से अपने गांव नरहौली लौट रहे संत रामनरायन (66) की बुधवार तड़के रोडवेज बस में सांसे थम गईं। निधन से आधा घंटा पहले ही उन्होंने अपने भतीजे को फोन कर लेने के लिए परिवार को सड़क पर बुला लिया था। दोपहर में संत का गांव में श्रद्धा पूर्वक विमान निकाला गया। उन्हें गांव भर के लोगों ने अंतिम विदाई दी। नरहौली के रामनरायन ने 20 साल पहले सन्यास लिया था। तब से वह गांव के मंदिर पर पूजा पाठ कर रहे थे। उनकी चौथी पीड़ी के सदस्य भूपेन्द्र सिंह चौहान ने बताया कि 26 जनवरी को काशी विश्वनाथ दर्शन के बाद वह प्रयागराज महाकुंभ पहुंचे थे। संगम स्नान के बाद अपने गुरु भाई के साथ आगरा तक आए। आगरा से रोडवेज बस में बैठ कर बाह के लिए चले थे। बुधवार तड़के 4 बजे के करीब उन्होंने अपने भतीजे अशोक कुमार से फोन पर बात की, खुद के फतेहाबाद होने की जानकारी देकर उन्होंने पूरे परिवार को लेने के लिए गांव की सड़क पर बुलाया था। परिवार के लोग सड़क पर पहुंच गये थे। कुछ देर बाद बाह सीएचसी से उनके निधन की खबर मिली। रोडवेज बस का कंडक्टर उन्हें अस्पताल ले पहुंचा था। जहां पर चिकित्सक ने मृत घोषित कर दिया। कंडक्टर ने परिजनों को बताया कि भाऊपुरा गांव के पास वह सीट से उठे थे। फिर बैठ गये थे। भतीजे अशोक कुमार, विजय सिंह, हरीशंकर, हंसराज बाबा, रामलाल, लक्ष्मीनरायन उनकी पार्थिव देह गांव लाए, श्रद्धा पूर्वक विमान निकाला गया। जिसमें गांव भर के लोग संत को अंतिम विदाई देने को जुटे। भूपेन्द्र सिंह चौहान ने बताया कि देव स्थल पर संत को समाधिस्थ कर दिया है।