प्रदेशभर में सीटू से संबद्ध मिड-डे मील वर्कर यूनियन के आह्वान पर सोमवार को मिड-डे मील कर्मियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर हड़ताल की। राजधानी शिमला में वर्करों ने टॉलैंड से छोटा शिमला स्थित सचिवालय तक रैली निकाली और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में महिला कर्मियों ने प्रदर्शन में भाग लेकर मानदेय बढ़ाने और अन्य मांगों को जल्द पूरा करने की मांग उठाई। यूनियन का आरोप है कि केंद्र और प्रदेश सरकारें वर्षों से मिड-डे मील कर्मियों की मांगों की अनदेखी कर रही हैं। वर्करों का कहना है कि पिछले 17 वर्षों से केंद्र सरकार ने उनके मानदेय में कोई बढ़ोतरी नहीं की है, जबकि महंगाई लगातार बढ़ रही है। ऐसे में मौजूदा मानदेय से परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है। प्रदर्शन के दौरान यूनियन ने प्रदेश हाईकोर्ट के 12 महीने का वेतन देने संबंधी फैसले को तत्काल लागू करने की मांग की। वर्करों ने कहा कि उन्हें पूरे वर्ष काम करना पड़ता है, लेकिन नियमित वेतन और अन्य सुविधाएं नहीं मिलतीं। चुनाव ड्यूटी के दौरान पोलिंग पार्टियों के लिए भोजन तैयार कराने का अतिरिक्त कार्य भी उनसे कराया जाता है, लेकिन इसके बदले कोई अलग मानदेय नहीं दिया जाता। यूनियन ने हरियाणा की तर्ज पर मिड-डे मील कर्मियों को न्यूनतम 7,000 रुपये मासिक मानदेय, ग्रेच्युटी, पेंशन, सामाजिक सुरक्षा लाभ और अन्य कर्मचारी सुविधाएं देने की मांग दोहराई। साथ ही चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। मिड-डे मील वर्कर यूनियन के प्रभारी जगत राम ने कहा कि वर्करों के साथ लंबे समय से अन्याय हो रहा है। उन्होंने सरकार से जल्द वार्ता कर मांगों का समाधान करने की अपील की।