पूर्व विधानसभा अध्यक्ष एवं पूर्व शिक्षा मंत्री राधारमण शास्त्री ने राजस्व घाटा अनुदान पर कहा कि हिमाचल प्रदेश में आर्थिक स्थिति पर जो चर्चा अब चल रही है, वह निश्चित या हर प्रदेशवासी के लिए चिंता का विषय है। लेकिन मुझे उस पर दो बातें कहनी हैं। पहली तो यह है कि हिमाचल प्रदेश को जो अनुदान मिलता रहा है पूर्व में, उसे तो केंद्र सरकार को जारी रखना ही चाहिए। अब एक प्रश्न और पैदा होता है कि जो भी कुछ खर्च हो रहा है, वह क्या ठीक हो रहा है या उसमें कमी है या ज्यादा हो रहा है। इसकी जो वित्तीय समीक्षा है, वह जरूर होनी चाहिए, वह अपेक्षित है। जहां ज्यादा खर्चा हो रहा है या खर्चों को कम किया जा सकता है, उस पर जरूर प्रदेश में जो है। वर्तमान सरकार चिंता करे और जहां जहां हम कोशिश कर सकते हैं कि खर्चे कम किए जा सकते हैं, वहां कम करें और फिर वित्तीय संसाधनों को जुटाने के लिए रात दिन एक करने की जरूरत है। भारत सरकार के साथ संपर्क बना करके जैसे गुजरात जैसी जगह में सात, सात, आठ, आठ फैक्ट्रियां सेमीकंडक्टर की लग गई। उत्तर प्रदेश में एक बहुत बड़ी फैक्टरी अब लगने वाली है सेमीकंडक्टर की, जिसमें 30 से 40 40,000 बच्चे जो हैं ना वो एडजस्ट हो सकते हैं। हमारे उनको नौकरी मिल सकती है, आजीविका मिल सकती है और साथ में प्रदेश के लिए भी थोड़ा बहुत आय का साधन बन जाता है। ऐसे कुछ बड़े बड़े उद्योगों को लाने के लिए भी प्रयास करना पड़ेगा। यह यह जो है प्रदेश सरकार को यह करना पड़ेगा। जितने भी सूक्ष्म और लघु और मध्यम उद्योग है, उनके लिए एक मास्टर प्लान बनाने की जरूरत हिमाचल प्रदेश में होंगे। अधिकारी गांव गांव में जाकर के अधिकारियों को जो है, समझाना होगा कि इस उद्योग का क्या फायदा है, उसके लिए क्या है और उसके लिए मार्केट को ढूंढना। यह बड़ा जरूरी है और इसको एक लार्ज स्केल पर जब तक हम नहीं करेंगे तब तक यह बात बनेगी नहीं। अब यह दोनों तरफ से जो है ना, यह समस्या है। अभी तो मुझे इतना ही कहना है कि केंद्र सरकार हमारा अनुदान जारी रखे और जो विगत वर्षों में इतना बड़ा भारी नुकसान हुआ प्रदेश का, उसको भी जो है वो भरपाई करनी चाहिए और प्रदेश सरकार को वित्तीय नियमन करना आवश्यक है।