शास्त्री भर्ती विवाद पर अब हिमाचल राजकीय संस्कृत शिक्षक परिषद भी सामने आया है। परिषद् के प्रदेशाध्यक्ष कमलकांत गौतम ने शास्त्री बेरोजगार संघ को अपनी मांगें और आपत्तियां उचित मंच पर उठाने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि अधिकारियों पर व्यक्तिगत टिप्पणी करने से समस्या का समाधान नहीं निकलेगा। उन्होंने कहा कि परिषद् संस्कृत, संस्कृति और संस्कृत विद्यालयों को बचाने के लिए कार्य कर रही है तथा शास्त्रियों की हर जायज मांग को सरकार के समक्ष उठाने के लिए तैयार है। अगर शास्त्री वर्ग की कोई मांग है तो परिषद उनके साथ खड़ी है, लेकिन अधिकारियों पर व्यक्तिगत आरोप लगाने से बात नहीं बनेगी। गौरतलब है कि वहीं, हाल ही में शास्त्री भर्ती प्रक्रिया को लेकर बेरोजगार अभ्यर्थियों का आरोप है कि पांच वर्षीय शास्त्री डिग्री धारकों को दरकिनार कर बीए और एमए संस्कृत अभ्यर्थियों को भर्ती में मौका दिया गया। संघ का दावा है कि 191 पदों में से केवल 40-50 वास्तविक शास्त्री डिग्री धारकों का चयन हुआ है। साथ ही भर्ती प्रक्रिया में पात्रता मानकों और कोर्ट के निर्देशों की अनदेखी के आरोप भी लगाए गए हैं।