ध्रुवांश शर्मा ने कहा कि स्कूल की ओर से मुझे पिकनिक में भेजा जा रहा था। ये दो साल पहले की बात है। उसके किए करीब चार-पांच हजार रुपये का खर्च आना था। मैंने पापा को कहा - पापा! मुझे हारमोनियम चाहिए। जो खर्च पिकनिक पर करना है, उतने पैसे से हारमोनियम खरीद लो। अब चार-पांच हजार में हारमोनियम तो नहीं आ सकता था। पापा ने ऑनलाइन देखा कि किसी ने हारमोनियम बेचना था। उन्होंने उनसे संपर्क किया। यह सेकिंड हैंड हारमोनियम था। इसे पापा ने छह हजार में खरीदा। मुझे भाषण देने का बहुत शौक है। स्कूल में मैं कई बार भाषण देता हूं। मुझे अनेक बार सम्मान मिले हैं। साथ ही मुझे भजन और लोकगीत गाने का भी शौक है। मेरे पापा का ट्रांसपोर्ट का अपना काम है और वह बागवान भी हैं। पापा ने मुझे हारमोनियम गिफ्ट किया तो मेरी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। मैंने इस पर भजन और लोकगीत गाने शुरू किए। मैं हारमोनियम बजाता हूं और गाता हूं तो पापा ढोलक बजाते हैं। पीछे कोरस भी करते हैं। आजकल छुट्टियां हैं तो रोज जिला शिमला की ग्राम पंचायत कमाह के अपने गांव पलाना के घर में हम रियाज करते हैं। वीडियो बनाते हैं। मुझे अभी लोग खूब प्रोत्साहित करते हैं। पहाड़ी लोकगीतों को गाते गाते में अपनी पहाड़ी बोली को भी ठीक से सीखने लगा हूं। इसमें मुझे बहुत मजा आता है।