उत्तर दिशा के ज्योतिष्पीठाधीश्वर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती 1008 पहली बार राजधानी शिमला पहुंचे।। शंकराचार्य गो हत्या को रोकने और गो माता को राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाने के लिए राजधानी के प्रसिद्ध जाखू मंदिर में गो ध्वज की स्थापना की। इसके बाद शहर के श्रीराम मंदिर में धर्मसभा का आयोजन रखा गया था, लेकिन उन्होंने इस कार्यक्रम का बहिष्कार कर दिया और जाखू मंदिर से ही संदेश दिया। साईं की मूर्ति होने की वजह से शंकराचार्य श्रीराम मंदिर नहीं गए। शंकराचार्य के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी शैलेंद्र योगिराज सरकार ने यह जानकारी दी। कहा कि हालांकि, इस पर मंदिर के ट्रस्टी भी शंकराचार्य से मिले और आश्वासन दिया कि जल्द बैठक कर साईं की प्रतिमा को मंदिर से हटाया जाएगा। इसी आधार पर राम मंदिर में भी एक गो ध्वज की स्थापना की गई। इसके बाद शंकराचार्य देहरादून के लिए रवाना हो गए। शंकराचार्य बुधवार रात को शिमला पहुंचने के बाद न्यू शिमला में अपने किसी अनुयायी के घर रुके थे। कार्यक्रम के संयोजक देवेंद्र पांडेय की ओर से भी एक बयान जारी किया गया है।