बच्चों में तार्किक सोच, एकाग्रता और नेतृत्व क्षमता विकसित करने के उद्देश्य से रोटरी क्लब शिमला ने रोटरी चैस पाठशाला की शुरुआत की है। रविवार को रोटरी टाउन हॉल में आयोजित इस पाठशाला में नन्हे खिलाड़ी शतरंज की बारीकियां सीख रहे हैं। इस पहल के तहत 5 से 16 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों को वरिष्ठ शतरंज प्रशिक्षक संजीवन सरस्वत प्रशिक्षण दे रहे हैं। प्रशिक्षण के दौरान बच्चों को शतरंज की चालों, रणनीति बनाने और खेल के दौरान निर्णय लेने की कला सिखाई जा रही है। रोटरी क्लब के अनुसार शतरंज बच्चों के मानसिक विकास में अहम भूमिका निभाता है। इससे बच्चों में धैर्य, समस्या समाधान की क्षमता और एकाग्रता बढ़ती है। रोटरी चैस पाठशाला की यह पहल आरएल मंचंदा एंडोमेंट फंड के तहत शुरू की गई है। क्लब का उद्देश्य अधिक से अधिक बच्चों को शतरंज से जोड़कर उनकी प्रतिभा को निखारना है।