हिमाचल प्रदेश राज्य संग्रहालय में शनिवार को भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन के सहयोग से घोंक्रोक्ता चैरिटेबल एंड एजुकेशनल ट्रस्ट मतियाना शिमला द्वारा टांकरी लिपि पुनर्खोज और पुनरुद्धार पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस अवसर पर एनएमएम भारत सरकार के निदेशक डॉ. अनिरबन दाश ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। संगोष्ठी में भाषा विज्ञान, सांस्कृतिक इतिहास और लिपि संरक्षण के क्षेत्र के प्रमुख विशेषज्ञों सहित शिमला के विभिन्न कॉलेजों के विद्यार्थियों ने भाग लिया। इनमें विश्वविद्यालय के प्रोफेसर, शोधकर्ता, डिजिटल अभिलेखपाल और सांस्कृतिक कार्यकर्ता भी शामिल थे, जो तकरी लिपि के पुनरुद्धार और प्रचार पर काम कर रहे हैं। इस संगोष्ठी का उद्देश्य टांकरी लिपि के इतिहास, क्षेत्रीय पहचान में इसकी भूमिका और इसके पुनरुद्धार के लिए समकालीन प्रयासों का पता लगाना है। राज्य संग्रहालय क अध्यक्ष हरि चौहान ने बताया कि गहन चर्चाओं, शोध प्रस्तुतियों और व्यावहारिक कार्यशालाओं के माध्यम से यह कार्यक्रम लिपि के महत्व और पुनरुद्धार की क्षमता के बारे में जागरूकता को बढ़ावा देगा।