दीन दयाल उपाध्याय जोनल अस्पताल शिमला में बुधवार को आशा वर्करों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में बच्चों में होने वाले कैंसर के शुरुआती लक्षणों की पहचान करने और समय रहते उपचार शुरू कराने के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. यशपाल रांटा ने आशा वर्करों को बताया कि यदि कैंसर के शुरुआती संकेत समय रहते पहचान लिए जाएं तो उपचार अधिक प्रभावी हो सकता है। उन्होंने आशा वर्करों से अपने-अपने क्षेत्रों में ऐसे बच्चों की पहचान करने और उन्हें शीघ्र स्वास्थ्य संस्थानों तक पहुंचाकर उपचार शुरू कराने में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। प्रशिक्षण के दौरान कैंसर से जुड़े प्रमुख लक्षणों, समय पर जांच की आवश्यकता और जागरूकता बढ़ाने के उपायों पर भी चर्चा की गई। स्वास्थ्य विभाग का उद्देश्य है कि आशा वर्करों के माध्यम से ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में भी बच्चों में कैंसर के मामलों की समय पर पहचान सुनिश्चित हो सके।