शुभ मुहूर्त पर शाही स्नान के साथ पवित्र मणिमहेश यात्रा का समापन हो गया। कोरोना काल में पहली बार चंद लोगों की मौजूदगी में ही मणिमहेश यात्रा के दौरान पारंपरिक रस्में निभाईं गईं। बुधवार को 10 बजकर 40 मिनट तक पवित्र स्नान का मुहूर्त था। यात्रा के समापन के बाद शिव चेले, दशनामी अखाड़े के संत, चरपटनाथ की छड़ी और कार्तिक स्वामी की छड़ियां वापस लौट आई हैं। शिवभक्तों की वापसी के दौरान पूरा कैलाश भोलेनाथ के जयकारों से गूंज उठा।